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केन्द्रीय विद्यालय संगठन से अभिप्राय
केन्द्रीय विद्यालय संगठन एक सोसाइटी के रूप में 15 दिसम्बर
1965 को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम (1860 के XXI) के तहत पंजीकृत
किया गया था। (परिशिष्ट-1) जिन उद्देश्यों के लिए संगठन स्थापित
किया गया था वे संस्था की अंतर्नियमावली और नियम (परिशिष्ट-1)
में दिए गए हैं । संगठन भारत सरकार में मानव संसाधन विकास
मंत्रालय द्वारा बनाई गयी केन्द्रीय विद्यालयों की योजना को
प्रशासित करता है। इसकी एक त्री-स्तरीय प्रबंधन संरचना है
जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। क्षेत्रीय कार्यालय विद्यालयों
के समूह और देश विदेश में फैले हुए केन्द्रीय विद्यालयों के
प्रबंधन के लिए है।
केन्द्रीय विद्यालय संगठन का सामान्य गठन
केन्द्रीय विद्यालय संगठन अपनी जनरल बाॅडी के माध्यम से कार्य
करने वाले केन्द्रीय विद्यालय संगठन को ही संगठन कहा जाता
है, इसके अधिशासी मंडल और तीन स्थाई समितियों अर्थात वित्त
समिति, शिक्षा सलाहकार समिति और निर्माण कार्य समिति का गठन
किया गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्री, केन्द्रीय विद्यालय संगठन का प्रभारी,
संगठन का पदेन अध्यक्ष होगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का
राज्य मंत्री उपाध्यक्ष होगा और इस कार्य के लिए भारत सरकार
द्वारा अधिसूचित मानव संसाधन विकास मंत्रालय का एक अधिकारी
उप-सभापति होगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का वित्तिय सलाहकार
ही संगठन का वित्त सदस्य होगा। संगठन के जनरल बाॅडी के अन्य
सदस्य संस्था के अंतर्नियम और नियमों के नियम अनुसार भारत
सरकार द्वारा नियुक्त किये जायेंगे। संयुक्त आयुक्त (प्रशासन)
संगठन का पदेन सचिव होगा।
Vision of Kendriya Vidyalaya
के.वी.एस. खुद को स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में एक विश्व स्तरीय
संगठन की कल्पना करता है, लगातार अध्यापकों को
सशक्त बनाने के के लिए प्रतिबद्ध है ताकि छात्रों में अंदर
बाहर का वास्तविक तालमेल हो और वे भविष्य की सामाजिक, राष्ट्रीय
और वैश्विक जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सक्षम
हो।
केन्द्रीय विद्यालय का मिशन
केन्द्रीय विद्यालयों के प्रमुख चार मिशन इस प्रकार है -
- केन्द्रीय सरकार के स्थानांतरणीय कर्मचारियों जिनमें
रक्षा तथा अर्धसैनिक बलों के कर्मी भी शामिल हैं, के बच्चों
को शिक्षा के सामान्य कार्यक्रम के तहत शिक्षा प्रदान
कर उनकी शैक्षिक अवश्यकताओं को पूरा करना ।
- विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठता और गति
निर्धारित करना ।
- केन्द्रीय माध्यमिक षिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.सी.) राष्ट्रीय
शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एन.सी.ई.आर.टी.)
इत्यादि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा के क्षेत्र
में नए-नए प्रयोग तथा नवाचार को सम्मिलित करना ।
- बच्चों में राष्ट्रीय एकता और ’भारतीयता’ की भावना
का विकास करना ।
प्राचार्य संदेश
बच्चे
राष्ट्र के सज्ग प्रहरी है। उनके द्वारा ही राष्ट्र का नवनिर्माण
होता है। वे देश का भविष्य है और उनके द्वारा ही आने वाली
नस्लों के लिए विरासत संजोई जाती है। उन्हें बहुत आगे तक जाते
हुए राष्ट्र को उन्नति के पथ पर अग्रसर करना है।
देश के भविष्य को सवारने वाले तीन व्यक्तियों में मुख्य तौर
पर माता, पिता और अध्यापक जिम्मेदार हैं। यधपि अध्यापक अपने
व्ययसाय अनुसार प्रशिक्षित होने के कारण इसमें महत्वपूर्ण
भूमिका अदा करता है। अध्यापकों पर माता, पिता, बच्चों और समाज
का अटूट विश्वास होता है। अध्यापक को कभी भी अपने शिष्य को
प्रताडि़त नहीं करना चाहिए बल्कि उसमें वांछिंत सुधार के लिए
प्रयासरत रहना चाहिए और उसपर अपनी छत्रछाया बनाई रखनी चाहिए।
यदि वे अशिष्ट की तरह कोसते है तो वे स्वयं उस स्तर तक गिर
जाते है आपका उद्धेश्य ही आपके सामने खुला मार्ग है जो आपका
मार्गदर्शित करते हुए यह दिखाता है कि आपके लिए जीवन में क्या
कुछ संभव है।
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